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जब बंधन, बंधन न बनकर आज़ादी को संग जीने का सहारा बन जाए!

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क्यों- जब कोई हमसे ज़्यादा प्यार करता है,  कोई हम पे मरता है,  जो अपना हर पल हमारे साथ बाँटना चाहता है,  हर पल हमें अपनी आँखों के सामने देखना चाहता है,  तो हमें ऐसा लगता है कि  हाँ, हम भी तुमपे जान छिड़कते हैं,  हम भी तुम्हें उतना ही प्यार करते हैं,  हम भी तुम्हारी फिक्र करते हैं,  पर इन सबके चलते हम यह भी समझते हैं  कि कुछ क्षण तुम भी शांति से केवल अपने साथ बिताना चाहते हो।  कुछ पल तुम, सब भुलाकर बस शून्य हो जाना चाहते हो।  सिर्फ अपने साथ, अपने अंतर्मन की आवाज़ सुनना चाहते हो।  हमारे अलावा जो तुम्हारे और भी करीबी रिश्ते हैं,  तुम उन्हें भी संवारना चाहते हो।  तुम उन्हें भी सहेजना चाहते हो।  तुम हमसे हो और हम तुमसे,  इसमें तनिक भी संदेह मात्र नहीं है।  परंतु हाँ, हम इसे भी सहज स्वीकार करते हैं  कि हमारे साथ-साथ तुम्हारे संसार में और भी रिश्ते हैं  जिन्हें तुम चाहते हो,  जिन्होंने हमारी अनुपस्थिति में तुम्हारा साथ दिया है।  अगर आज तुम यहाँ हमारे साथ इतने प्रेम से जीवन जी रहे हो,  ...