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Yamuna yatra - यमुना का सफर यमनोत्री से दिल्ली तक

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Looking at black drain like Yamuna, it never occured to us that we will ever take a dip in it!To our surprise, we never thought of the river beyond Delhi, Agra where the water has become so toxic! The credit goes to Mr Vimlendu, founder of Swechha who not only made us think, but also took us on the journey of Yamuna from Yamunotri to the plains! Since it was monsoon the river was gushing with water from - the seasonal streams, waterfalls, all over the mountains and thus we experienced the river in full bliss when the nature was blooming with greens and water bodies all across. But we were told that it is not the same in winters and summers when there is enough water to meet everyone's need but not everyone's greed. The river almost dies as it enters the plains where all its water is harnessed through multiple giant barrages (add name kd dams ) and canals and there is often an inter state tussle which happens as to what part of Yamuna belongs to whom! Isn't it strange that s

Unconscious Lifestyle

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  Do you know how you sleep, what do you eat, how do you think, what do you think, how do you behave, what you like, what you dislike... Everything makes who you are and all of these will have a combined effect on how you actually become- smart, active, cranky, healthy, unhealthy, fit, obese or just name anything! Generally, it is taught to us since childhood that study well to be successful and lead a happy life thereafter. But it is hardly taught to us that to be happy, the foremost thing is to stay healthy. Until and unless we are mentally and physically sound, we will not be able to give our 100 per cent to be successful and even if we become successful, if we do not take care of ourselves, we will not be able to taste the success for long. It will diminish soon with our diminishing health. Thus, it is very important to have a balanced lifestyle in order to be a healthily happy being! Hmmm...so following a perfectly natural healthy diet scares the hell out of you too, then s elect

ढूंढ रहें है भरोसा प्रेम के सागर में

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जाने क्यों लोग अपनी ही बात से मुकरते हैं, जाने क्यों लोग झूठ बोलते हैं , जाने क्यों लोग आने का बोलकर नहीं आते हैं, जाने क्यों लोग आश्वासन देकर पीछे हट जाते हैं, जाने क्यों लोग अपनी सच्चाई का हवाला देकर एक झूठ और बोल जाते हैं, जाने क्यों, जाने क्यों, जाने क्यों ? जाने क्यों लोग अपनो से पराया सा बर्ताव कर जाते हैं, जाने क्यों खुद को ईमानदार कहकर एक और गद्दारी कर जाते हैं, जाने क्यों लोग प्यार के बदले बस एक खट्टी सी याद छोड़ जाते हैं? जाने क्यों, जाने क्यों, जाने क्यों ? जाने क्यों लोग काम नहीं है, खाने के लिए नहीं है, बच्चे भूखे हैं, कहते थकते नहीं, जब उन्हें कोई काम भाता नहीं? जाने क्यों कामचोरी करते हैं? जब करने के लिए काम मिलते हैं, जब पेट भरने के लिए पैसे मिलते हैं, तो क्यों खाली पेट सोते हैं? जाने क्यों , जाने क्यों, जाने क्यों ? हां, माना कि हम भी कोई तीस्मरखान नहीं। गलतियां ऐसा नहीं कि हम करते नहीं। पर ध्यान भी ऐसा नहीं कि हम रखते नहीं। सर्दी में गरम कपड़े हो या हो 3 टाइम का खाना, और टीवी दिखाना, कसर हमने भी कहीं कोई छोड़ी नहीं। बदतमीजी से बात तुमसे हमने कभी करी नहीं, तनख्वा किसी

पत्थर का जवाब पत्थर से दिया तो क्या गजब किया, क्या दे सकते हो पत्थर के बदले प्यार?

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पत्थर का ज़वाब पत्थर से देना कोई बड़ी बात नहीं।  प्रेम के बदले प्रेम लुटाना कोई बड़ी बात नहीं । लाड़ पर लाड़ लगाना कोई बड़ी बात नहीं । कोई प्रेम से रहे, उसपर प्रेम लुटाना कोई बड़ी बात नहीं । कोई सहजता से समझे, उसे समझाना कोई बड़ी बात नहीं । खुशी के माहौल में गलतियां माफ़ करना या खुद की गलतियां ढूंढ पाना कोई बड़ी बात नहीं । जब प्रसन्नचित  हो हृदय, दुख को सुख कहकर मुस्कुरा देना कोई बड़ी बात नहीं। जब 100 काम सही हो, तो एक गलत काम पर खुदको ना कोसना कोई बड़ी बात नहीं । पर  पर  पर  जब कोई बात बिगड़ जाए, जब कोई मुश्किल आ जाए, जब दिल किसी भी कारण टूट जाए, या यू ही तन्हा हो जाए, जब कहीं चोट लग जाए, 100 में से 99 काम बिगड़ जाए , जब किसी से मन रूठ जाए, जब दिमाग साथ न दे, तब  तब  तब भी जो मुस्कुरा के कह दे, शुक्रिया, तुमने दिया साथ हमारा, तुम देना यूंही साथ हमारा, रहना हमें संभाले इसी तरह । दिल जब हमेशा मुस्कुराये, दिमाग जब दूसरे से पहले खुदकी खता समझ जाए, लड़ाई से पहले समझाइश हो जाए, गुस्से की जगह दिल प्रेम से भर जाए, आंसू की जगह चेहरे पर मुस्कान छा जाए, तो  कहना, हम देंगे तुम्हारा साथ सदा। तुम द

प्रेम

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प्रेम किसीको पाना नहीं, प्रेम खुदको किसीमें खो देना है। प्रेम में ये सोचना कि हमे क्या मिलेगा?  प्रेम की पवित्रता को कम कर देता है क्योंकि प्रेम तो बस अपना सब कुछ न्यौछावर करना है। प्रेम जीवन को एक नयी ऊर्जा प्रदान करता है।  इसलिए नहीं कि जिससे हम प्रेम करते हैं वो सदा हमारे साथ रहे और हमें प्रेम करे बल्कि इसलिए कि प्रेमी का होना ही है काफी,  उसके होने में ही सिमट जाती है दुनिया हमारी।  प्रेम साथ में रहना नहीं,  साथ में जीना सिखाता है।  प्रेम हमारे हृदय में वास करता है,  उसका दुनिया के बंधनों से कोई नाता नहीं।  दुनिया प्रेम को संग जीने में 100 प्रतिबंध लगा देती है।  पर प्रेम कोई प्रतिबंध नहीं जानता।  वो तो बस हो जाता है..  दिमाग चाहे लाख बहाने बनाए,  दिल तो बस किसीका हो जाता है।  प्रेम की महिमा का बखान दिल के ही बस में है,  दिमाग तो बस दुनिया के आडम्बरों में उलझकर रह जाता है!  जो दिमाग की सुनने में रहता है,  प्रेम अक्सर उससे दूर हो जाया करता है।  किसी के प्रेम में खो जाना आसान नहीं और एक बार खो गए तो लौटना मुमकिन नहीं।

मेरा दिल झुका जाए माँ-पापा की ही ओर जब-जब ये दुनिया मचाये शोर!

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लोगों को ऐसा कहते सुना है एक परिवार का सबसे ज़रूरी हिस्सा होती है नारी - या कहें माँ। हाँ, इसमें ज़रा भी संशय नहीं कि एक परिवार को जोड़ने का काम माँ ही करती हैं। वह ही हैं जो हर किसी की गो-टू पर्सन होती हैं जब भी जीवन में कोई घटना घटित हो जाती है, या परिवार के किसी दूसरे सदस्य से हमारी खिट-पिट हो जाती है। पर इन सबका अर्थ ये बिल्कुल नहीं है कि घर की सारी जिम्मेदारियाँ बस माँ की ही हैं! माँ के अंदर इतनी काबिलियत ज़रूर होती है कि वह अकेले ही सब कुछ संभाल लें पर एक बच्चे के जीवन में माता-पिता दोनों ही एक विशेष भूमिका निभाते हैं। मैं काफी खुश नसीब मानती हूँ खुदको कि मैंने माँ-पापा दोनों का साथ पाया है, दोनों के प्रेम को जीया है, दोनों को अपने हर फैसले में अपने साथ खड़ा पाया है। दोनों ही बराबर का रोल निभाते हैं, एक गाड़ी है, तो दूजा गाड़ी की मोटर। एक पौधा है, तो दूसरा उसको सींचने वाली धूप! माँ पर लिखना जितना आसान है, उतना ही मुश्किल है पिता के बारे में लिख पाना क्योंकि माँ तो मन की बात बड़ी आसानी से कह दिया करती हैं पर पापा तो बस अपने मन में ही कहके रह जाया करते हैं! और ऐसा तो है ही क

Are you feeling lonely too?

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Sharing my reflection post watching this  video  on loneliness which left me shattered and in deep thoughts.   Am I not really lucky to be blessed with my loving parents, my caring siblings, and my trustworthy friends and family? These people add a lot of happiness and completeness to my life every single day and every single moment. Yet, I feel as though I am caged, or maybe why are relationships even important? Yaa, the privileged ones always take their privileges for granted. Isn't it?  The ones who get to study in the school and college of their choices never considered studies to be important.  The ones blessed with loving and caring parents are mostly found complaining that their parents are way too much, always back and behind them - eat well, sleep on time, take rest, etc The ones blessed to find the love of their life are often found complaining about the few bad things in their partners like obsession, extra caring, too possessive, doesn't do this and that, etc. On th